जीवन जीने की कला

प्रेम कुछ भी नहीं बस एक एहसास है।

दुनिया में बहोत सारे रिश्ते है जिनके अंदर प्रेम है। जिनमे माँ बेटा, बहन भाई, पती पत्नी, कुछ ऐसे जिनसे कोई भी रिश्ता नहीं होता फिर भी प्रेम होता है। जैसे दोस्त, अपने देश प्रति प्रेम, मजहब, और न जाने कितने और।
प्रेम इस शब्द का अर्थ बोहोत ही बड़ा है। क्यु करते है हम एक दूजे से प्रेम? क्यु हम प्रेम में एक दूजे के लिए जीते है? एक दूजे की केयर लेते है?

प्रेम और कुछ नहीं एक एहसास है। जिस एहसास की डोर से हम उनके प्रति आदर सन्मान और प्रेम व्यक्त करते है। एक लास्ट पोस्ट में मैंने प्रेम प्रेम में कितनी शक्ती है वह बताया था। प्रेम में अपार शक्ती है। पर प्रेम एक एहसास है। आप जितना एहसास करवाते जाओगे उतना ही आपका प्रेम बढ़ेगा। प्रेम नाम सुनने में कितना शीतल लगता है। जहा जहा नफरत की दीवार बनती है उसे तोड़ने का काम प्यार कारता है। जहा नफरत बढ़ेगी वहा एहसास दिलाना, प्यार जताना वह दीवार अपने आप टूट जाएगी।
हर वक्त प्रेम यानी एक ही बात सम्भोधी जाती है। और फिल्म इंडस्ट्री ने तो इसका पुरी तरह से कचरा कर के रखा है। प्रेम याने हर वो एहसास जो आपको आपके अपनों से बात करने पर मजबुर करे। उनके साथ पल बिताने में मजबुर हो। उस एहसास का नाम प्रेम है।

जीवन जीने की कला

Advertisements