जीवन जीने की कला

आदमी को निचे गिरानेवाला अहंकार से वेगवान मार्ग नहीं है

आत्मशुद्धि मन्त्र के ८ वे एवं ९ वे गाथे में कहा है

देख देख तन की सुन्दरता,
खुश होकर के फुल रहा।
लुट गयी तेरी रूप सम्पदा,
सनत चक्री को भूल रहा।।८।।
वैभव में मतवाला होकर,
घूम रहा जैसे हस्ती।
रावण जैसे चले गए,
फिर तेरी कोण बता हस्ती।।९।।

मै यह कर सकता हु यह कॉन्फिडेंस है दोस्तों पर मेरे सिवा यह काम कोई नहीं कर सकता यह अहंकार है। बड़े बड़े चले गए इस अहंकार रखने के चक्कर में ना रावण बचा ना कंस। इस दुनिया में तू भी खाली हात आया था मै भी खाली हात आया हु तु भी खाली हात जाएगा और मै भी खाली हात जाउगा। फिर क्यों घमन्ड है क्यों अहंकार रखते हो। अहंकारी व्यक्ती का साथ कोई नहीं देता इस जगत में इसी लिए रावण को भी बिबिशन छोड़ आए।
दुनिया का नियम है जो गरजता है वह बरसता नहीं इसीलिए मेरे दोस्त छोड़ दो गरजना इस अहंकार के चक्कर में हमें तो बरसना है इस प्रभु की भक्ती में।
कितना भी अहंकार रखो एक दिन मिटटी का शरीर है उसकी राख ही होगी। कितना भी ब्रांडेड ले लो दोस्तों कफन का कोई ब्रांड नहीं होता।

छोड़ दीजिए अहंकार को आपका १०० प्रतिशत फायदा ही होगा। क्योकी आजकाल अपने को फायदे का सौदा ही पसंद है।

जीवन जीने की कला

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